प्रति…
माननीय मुख्यमंत्री महोदय
छ्तीसगढ़ सरकार रायपुर
विषय….जनता की आस्था और विश्वास के मद्देनजर भोजली घाट निर्माण बावत आवेदन
माननीय मुख्यमंत्री महोदय…
देश दुूनिया में बिलासपुर जिला आदिशक्ति माता महामाया की नगरी के नाम से विख्यात है। छत्तीसगढ़ में अविभाज्य मध्यप्रदेश के समय से बिलासपुर को धार्मिक नगर का सम्मान हासिल है। इतिहास के पन्नों में रतनपुर को क्षेत्र की राजधानी का दर्जा हासिल है। जाहिर सी बात है कि बिलासपुर शहर भी इस सम्मान से अछूता नहीं है। लोगों की आस्था और विश्वास को ध्यान में रखते ही समय समय पर बिलासपुर शहर समेत जिला के अन्य स्थानों में मंदिर मठों का निर्माण किया गया। कालान्तर में यह स्थान बिलासपुर की पहचान के रूप में स्थापित हैं।
बिलासपुर जिला स्थित ताला,मल्हार,रतनपुर,लुतरा का अपना गौरवमयी स्थान है। जिला मुख्यालय के मध्य से अरपा नदी का बहाव होता है। बिलासपुर नगर अरपा के चलते दो भागों में बंटा है। आदि ग्रन्थों में अरपा को माता पार्वती का स्वरूप माना गया है। अरपा तट स्थित किलावार्ड जूना बिलासपुर पुराना नगर है। किलावार्ड से लगे अरपा तट पर पिछले सौ साल से भोजली विसर्जन किया जाता रहा है। यह परम्परा आज भी जारी है। प्रदेश के कोने कोने से लोग बिलासपुर के अरपा तट स्थित भोजली विसर्जन का विहंगम दृष्य देखने आते हैं। भोजली विसर्जन के दिन मेला जैसा वातावरण हो जाता है। इस दौरान कई लोगों को रोजगार का अवसर भी मिलता है।
महोदय पिछले दो साल से अरपा नदी पर परम्परागत भोजली घाट के दोनो तरफ करीब आठ किलोमीटर के अन्तराल में दो बैराज बन रहे है। कमोबेश बैराज बनकर तैयार भी हो गया है। धीरे धीरे अरपा का जलस्तर बढता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार अरपा का जलस्तर करीब 15 से 20 फिट ऊपर हो जाएगा। जाहिर सी बात है कि अभी से ही परम्परागत भोजली घाट डूबने लगा है। निश्चित रूप से विकास ने आस्था के सामने प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है। लोगों के सामने अब परम्परागत रूप से मनाये जाने वाला भोजली पर्व पर भोजली विसर्जन की समस्या खड़ी हो गयी है।
महोदय आपका पूरा जीवन छत्तीसगढ़ की माटी से ओत-प्रोत है। आपको छत्तीसगढ़ की धर्म संस्कृति और परम्पराओं से ना केवल गहरा लगाव बल्कि गहन पहचान भी है। छत्तीसगढ़ महतारी के योग्य पुत्र होने के कारण आपको भोजली पर्व के महत्व की अच्छी जानकारी भी है। आप प्रदेश में मनाए जाने वाले एक एक पर्व की भाषा को ना केवल समझते हैं। बल्कि पर्व के मर्म को आत्मसात भी किया है। महोदय बताना जरूरी है कि परम्परागत भोजली घाट डूब क्षेत्र में आ गया है। इस बात को लेकर आस्थावानों में भोजली विसर्जन स्थल को लेकर चिंता सताने लगी है।
महोदय नगर के मध्य स्थित जगमल चौक से राजकिशोर नगर की तरफ जाने वाले रास्ते में अरपा नदी पर विशाल पुल बना है। पुल पार करते ही एक तरफ एशिया का सबसे बड़ा छट घाट है। सूर्य उपासकों और छठ माता में आस्था और विश्वास रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए अरपा तट पर छठ घाट का निर्माण हमारी डॉ. रमन सिंह सरकार के कार्यकाल में किया गया। आज यह घट जगत प्रसिद्ध है। इतना विशाल घाट घाट बिहार में बहने वाली गंगा नदी पर भी नहीं है।
पुल की दूसरी स्मृति वन की जमीन को छूकर अरपा नदी बहती है। तट पर बहुत बड़ा स्थान खाली है। कटाव रोकने के लिए यहां कचरों का पटाव किया गया है। इसके चलते बहुत बड़ा मैदान अरपा तट पर तैयार हो गया है। बिलासपुर वासियों की मांग है कि अरपा तट के इस खाली जमीन पर छट घाट की तर्ज पर भोजली घाट का निर्माण किया जाए। यह छट घाट से लगा होगा। महोदय बताना जरूरी है कि बिलासपुर नगर का लगातार विस्तार हो रहा है। यह क्षेत्र निगम क्षेत्र का हिस्सा है। बिल्डर लोग अरपा तट की खाली जमीन पर अवैध कब्जा का प्रयास लगातार कर रहे हैं। क्योंकि इतना खाली जमीन अरपा तट पर कहीं नहीं है। जमीन शासन की है…। नदी के बहाव से स्मृति वन की जमीन का लगातार कटाव भी हो रहा है।
महोदय पुराना भोजली घाट डूब रहा है। ऐसे में भोजली विसर्जन को लेकर आस्थावानों की चिंता बढ़ गयी है। हम बिलासपुर वासियों का आपसे अनुरोध है कि अरपा तट स्थित स्मृति वन के पीछे खाली जमीन पर आस्थावानो के लिए भोजली घाट का निर्माण कर तोहफा दिया जाए। कितना अच्छा होगा कि पुल की एक तरफ मा छठ माता का घाट होगा। दूसरी तरफ भोजली माता का घाट होगा। देश में ऐसा दृष्य बहुत कम देखने को मिलता है। दो संस्कृति नदी के एक तट पर अपनी आस्था और विश्वास की गलबहियां करें।
मान्यवर लोगों की भावनाओं का ख्याल रखते हुए छत्तीसगढ़ की आस्था और संस्कृति के संवर्धन और संरक्षण की दिशा में भोजली घाट का निर्माण और स्थान बहुत जरूरी है। कृपया लोगोौं की भावनाओं का सम्मान करते हुए बिलासपुर वासियों को भोजली घाट का तोहफा प्रदान करने की महति कृपा करें।
वाणी राव…वरिष्ठ भाजपा नेता,पूर्व मेयर बिलासपुर

